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फर्जी एवं दोषपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर भूमि अंतरण का मामला, जांच प्रतिवेदन के आधार पर कार्रवाई
भूमि को विधिवत शासन में निहित करने की प्रक्रिया की जाएगी
अम्बिकापुर, 23 सितम्बर 2026/ कलेक्टर सरगुजा ने अम्बिकापुर के प्रतीक्षा बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित भूमि खसरा क्रमांक 3714 से संबंधित मामले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अम्बिकापुर के जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के निर्देश तहसीलदार अम्बिकापुर को दिए हैं। इसके साथ ही उक्त भूमि को विधिवत शासन में निहित करने की प्रक्रिया की जाएगी।
प्रकरण में शिकायत प्राप्त हुई थी कि प्रतीक्षा बस स्टैंड अम्बिकापुर स्थित खसरा क्रमांक 3714 की भूमि में स्थित जल क्षेत्र को पाटकर प्लाटिंग की जा रही है। शिकायत में उक्त क्षेत्र के तालाब के रूप में उपयोग तथा स्थानीय लोगों द्वारा निस्तारी सहित विभिन्न प्रयोजनों में उपयोग किए जाने का उल्लेख किया गया था। शिकायत के तथ्यों की जांच अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अम्बिकापुर से कराई गई।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार प्रश्नाधीन भूमि अधिकार अभिलेख वर्ष 1954-55 के पूर्व से जैलाल पिता बोधन, जाति गोंड़ के नाम पर दर्ज होना पाया गया। जांच में भूमि के अंतरण की प्रक्रिया में फर्जी एवं दोषपूर्ण दस्तावेजों के उपयोग तथा वारिसों से संबंधित अभिलेखों में अनियमितता का उल्लेख किया गया है।
जांच के दौरान नगर पालिक निगम अम्बिकापुर से मृत्यु प्रमाण पत्र के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई। निगम द्वारा 4 मई 2026 को दी गई जानकारी के अनुसार जैलाल पिता बोधन की मृत्यु दिनांक 23 अप्रैल 1976 से संबंधित प्रस्तुत मृत्यु प्रमाण पत्र नगर पालिक निगम अम्बिकापुर में दर्ज नहीं था और न ही निगम द्वारा जारी किया गया था।
जांच प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमलभिट्ठी के पटवारी द्वारा जैलाल पिता देवराम के वारिसों की जानकारी तैयार कर दी गई थी, लेकिन उक्त जानकारी का उपयोग जैलाल पिता बोधन के वारिसों के संबंध में करते हुए राजस्व अभिलेखों में फौती नामांतरण की कार्रवाई कराई गई।
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के जांच प्रतिवेदन में चन्द्रशेखर यादव पिता स्व. जगतपाल यादव तथा आजाद इराकी पिता रियाजुद्दीन इराकी की भूमि अंतरण में भूमिका का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही अन्य विक्रेताओं नोहरसाय, रामकुमार, श्रीलाल, पूर्णिमा, जनकुंवर, चन्द्रभान यादव एवं मीरा यादव की संलिप्तता भी जांच प्रतिवेदन में प्रतीत होना बताया गया है। ग्राम पंचायत अमलभिट्ठी के तत्कालीन संबंधित सरपंच एवं सचिव की भूमिका को भी जांच में संदेहास्पद बताया गया है।
जांच प्रतिवेदन में अनुसूचित जनजाति वर्ग की उक्त भूमि के अंतरण में फर्जी एवं दोषपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर छल-कपट एवं धोखाधड़ी किए जाने का उल्लेख किया गया है। इसके आधार पर कलेक्टर ने तहसीलदार अम्बिकापुर को संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराकर पालन प्रतिवेदन अविलंब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन द्वारा प्रकरण में राजस्व अभिलेखों एवं जांच प्रतिवेदन के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई करते हुए उक्त भूमि को विधिवत शासन में निहित करने की प्रक्रिया भी की जाएगी।
