निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने पहुंची नगर पंचायत उपाध्यक्ष नेहा सन्नी बंसल,।

लखनपुर नगर पंचायत लखनपुर की कार्यप्रणाली वैसे तो हमेशा ही सवालों के घेरे में रहती है एक बार फिर नगर पंचायत की कार्यप्रणाली से अब नगर पंचायत विवादों में नजर आ रहा है।जहाँ आज सुबह 10 बजे के करीब स्थानीय लोगों की शिकायत पर नगर पंचायत उपाध्यक्ष नेहा सन्नी बंसल लखनपुर के वार्ड क्रमांक 08 पुराना बसस्टैंड स्थित हमर क्लिनिक के पास चल रहे दुकान निर्माण कार्यों का जायजा लेने पहुंची। इस दौरान मौके पर उप अभियंता नगर पंचायत प्रदीप एक्का और नगर पंचायत के पार्षदगण ,नगर पंचायत कर्मचारी और स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे। वातावरण उस समय गहमा गहमी का हो गया जब कलेक्टर सरगुजा के आदेश अनुसार कार्य का नियम विरुद्ध होना पाया गया दरअसल सरगुजा कलेक्टर के 28 जुलाई 2025 की जारी आदेशानुसार अंबिकापुर बिलासपुर मुख्यमार्ग से 22.50मीटर छोड़ कर दुकानों का निर्माण किया जाना था परंतु जब नगर पंचायत के कर्मचारियों ने फीते के सहारे से मौके की जांच की तो मुख्य सड़क से महज 13 मीटर में ही निर्माण कार्य का होना पाया गया। नगर पंचायत उपाध्यक्ष ने तत्काल इस संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी को दूरभाष के माध्यम से अवगत करा मौके पर जाँच हेतु बुलाने का प्रयास किया गया परंतु नगर पंचायत सीएमओ ने साफ़ शब्दों में मौके पर जाने से मना कर दिया जिसके बाद मामले में विवाद और गहराता चला गया तथा उपस्थित सभी पार्षद इस बात का विरोध करते नजर आए कि आखिर नगर पंचायत द्वारा कलेक्टर सरगुजा की आदेश की अवहेलना करते हुए निर्धारित मानकों के अनुसार निर्माण कार्य क्यों नहीं कराया गया। निर्माण कार्य के संबंध में जब नगर पंचायत उपाध्यक्ष नेहा सन्नी बंसल ने उपाभियंता प्रदीप एक्का से बात की तो उनका कहना था की इस कार्य का लेआउट कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल,सांसद चिंतामणि महाराज और अध्यक्ष सावित्री दिनेश साहू के समक्ष दिया गया है और सारे निर्माण कार्य नियमों को ध्यान में रख कर किए जा रहे हैं। उपअभियंता के इस तरह जवाब दिए जाने के बाद सभी पार्षदों एवं उपाध्यक्ष ने सीएमओ और उपाभियंता पर नियम विरुद्ध निर्माण कार्य कराये जाने सहित गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य कराए जाने के गंभीर आरोप लगाये। उपाध्यक्ष नेहा सन्नी बंसल से जब मीडिया ने बात की तो उन्होंने कहा की स्थानीय निवासियों से मिली जानकारी के आधार पर वो आज निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुंची थी जहाँ निर्माण कार्य नियम विरुद्ध तरीके से किया जाना पाया गया है। कलेक्टर के आदेशानुसार मुख्यमार्ग से 22.50 मीटर छोड़कर निर्माण कार्य किया जाना था परंतु नगर पंचायत सीएमओ और उपाभियंता के द्वारा महज 13 मीटर में ही उक्त निर्माण कार्य को कराया जा रहा था।उपाध्यक्ष ने नगर पंचायत सीएमओ पर अभद्रतापूर्वक व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हमर लखनपुर का बोर्ड जो लखनपुर पार्क में लगाया गया है वो भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया है उसकी वास्तविक लागत उतनी नहीं हैं जितना की नगर पंचायत ने अपने बिल में बताया है साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बार बार बुलाने पर भी नगर पंचायत सीएमओ मौके पर नहीं पहुंचे और न ही उनसे अच्छे से बात की। इन सभी बातों के बीच अब नगर पंचायत में निर्माण कार्य को लेकर घमासान युद्ध छिड़ा हुआ है जहाँ एक तरफ़ उपाध्यक्ष नगर पंचायत सीएमओ और इंजीनियर पर निर्माण कार्य को लेकर गंभीर आरोप लगाती नज़र आ रही हैं तो वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत सीएमओ से जब दूरभाष से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सारे निर्माण कार्य नियम के अनुरूप ही किए जा रहे हैं। अब उपाध्यक्ष ने नगरीय प्रशासन विभाग को और संबंधित विभागों को इस मामले में पत्र लिख अवगत कराने की बात कही है साथ ही मामले की गंभीरता से जाँच कर भ्रष्टाचार करने वाले दोषियों पर एफआईआर दर्ज करते हुए कड़ी कार्यवाही किए जाने की मांग भी की है साथ ही सीएमओ के द्वारा अभद्रता पूर्वक व्यवहार करने के मामले में भी कड़ी कार्यवाही की बात कही है । वहीं उपाभियंता द्वारा मामले में कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल का नाम लिए जाने के बाद अब इस मामले में सियासी पारा भी चढ़ता नजर आ रहा है जहाँ नियम विरुद्ध कार्य में विधायक के सहमति होने की बात अब लोगो के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। अब देखना यह होगा इस निर्माण कार्य को लेकर नगरीय प्रशासन विभाग की तरह का रूख अपनाती है और इस मामले में किस तरह की कार्यवाही देखने को मिलती है फिलहाल उक्त निर्माण कार्य को निरीक्षण के बाद रोक दिया गया है तथा जांच पूर्ण नहीं हो जाने तक कार्य प्रारंभ नहीं किए जाने की बात कही गई है। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर किसके संरक्षण में लंबे समय से नगर पंचायत में भ्रष्टाचार का खेल जारी है? लगातार भ्रष्टाचार की बात ,नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर लोगो के सवाल,और नियमो की अनदेखी कई सारे सवालों को जन्म देती है जिनके जवाब शायद ही मिल पाये। आज के निरीक्षण के बाद यह तो पूर्णतः स्पष्ट हो जाता है की नगर पंचायत अब एक बड़े विवाद के घेरे में फँस चुका है और जहाँ नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सीएमओ और उपाभियंता के ऊपर गंभीर आरोप लगे हैं। सवाल यह भी है कि जब नगर पंचायत को सब पता था उसके बाद भी उक्त निर्माण कार्य उस स्थल पर कैसे प्रारम्भ कराया गया और क्या इस कार्य की निगरानी करने वाला कोई नहीं था या फिर नगर पंचायत में मिली जुली सरकार चला भ्रष्टाचार का खेल लंबे समय से चला आ रहा था जिसकि परत दर परत अब इस निरीक्षण के बाद खुलती नजर आ रही है।

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