विभाजन विभीषिका स्मरण दिवस” पर कार्यक्रम एवं प्रदर्शनी आयोजित ।

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विभाजन के दौरान प्राण गवाने वालों की स्मृति में दीप प्रज्ज्वलित कर उन्हें किया गया नमन

भारत का विभाजन केवल भूगोल का विभाजन नहीं था, यह लाखों परिवारों के घर, रिश्तों, सपनों और स्मृतियों का बिखराव था- मंत्री श्री राजेश अग्रवाल

अंबिकापुर,14अगस्त,2026/स्वतंत्रता दिवस के पूर्व 14 अगस्त को जिला कलेक्टरेट सभाकक्ष में “विभाजन विभीषिका स्मरण दिवस” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने विभाजन के दौरान प्राण गवाने वाले लोगों की स्मृति में दीप प्रज्ज्वलित कर उन्हें नमन किया । वहीं मौन धारण कर श्रद्धाजंलि अर्पित की गई। इस दौरान विभाजन की विभीषिका पर आधारित वीडियो प्रदर्शित किया गया।

कार्यक्रम मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि देश के विभाजन के समय हिंसा व घृणा के साए में विस्थापित हुए हमारे असंख्यों भाई-बहनों के त्याग, संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने ’विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया। निश्चित रूप से इस निर्णय के लिए हम पूरे देशवासी हमारे प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। भारत का विभाजन केवल भूगोल का विभाजन नहीं था, यह लाखों परिवारों के घर, रिश्तों, सपनों और स्मृतियों का बिखराव था। आज का दिन उन सभी ज्ञात-अज्ञात पीड़ितों और विस्थापितों को श्रद्धांजलि देने का भी है। आज की युवा पीढ़ी के सामने इस स्मृति दिवस का विशेष संदेश है। हमारा कर्तव्य है कि सत्यापित जानकारी को ही आगे बढ़ाएं और समाज में शांति, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करें।आज विभाजन की विभीषिका को स्मरण करते हुए हम उन सभी आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करें जिन्होंने उस त्रासदी में अपने प्राण गवाए और उन परिवारों को नमन करें जिन्होंने असहनीय पीड़ा के बावजूद अपने जीवन को पुनः खड़ा किया। आइए, आज हम एक सामूहिक संकल्प लें, न हम इतिहास को भूलेंगे, न इतिहास की पीड़ा से नफरत पैदा होने देंगे। हम अतीत की स्मृति में रहेंगे, वर्तमान को सद्भाव से संभालेंगे और भविष्य के भारत को एकजुट, शांतिपूर्ण, संवेदनशील और शक्तिशाली राष्ट्र बनाएंगे। विभाजन की रेखाएं इतिहास ने खींची थीं, लेकिन भारत की आत्मा को कभी विभाजित नहीं किया जा सकता।

गृह निर्माण मण्डल अध्यक्ष श्री अनुराग सिंहदेव ने कहा कि विभाजन की त्रासदी देश के इतिहास का एक अत्यंत पीड़ादायक अध्याय है। इस दिवस का उद्देश्य विभाजन के दौरान प्रभावित हुए लोगों के संघर्ष और बलिदान को स्मरण करना तथा आने वाली पीढ़ियों को इतिहास की इन घटनाओं से अवगत कराना है। लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज ने कहा कि देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए लाखों लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। देश के विभाजन के समय 14 अगस्त 1947 को कई लोगों ने अपने प्राण गंवाए, विभाजन विभीषिका स्मरण दिवस उन्हें याद कर श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिन है। ‘देश प्रथम’ की भावना से खड़े होना, ये हर नागरिक का कर्तव्य है और इस कर्तव्य में हम सब लोग, खासतौर पर जो नई पीढ़ी है, हमारी जेन्जी और जेनएल्फा को समझना होगा।
​ कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने कहा कि भारत का विभाजन देश के लिए एक दु:खद अध्याय था और विभाजन के साथ ही उसकी विभीषिका में जो देश को जान माल का नुकसान हुआ था, उसे याद कर संयोजित करने के लिए हम इस दिवस का आयोजन करते हैं। उस समय हमारे देश और लोगों को जो नुकसान हुआ, उन स्मृतियों को आज दोहराने का दिवस है। आज हम सब उन सभी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

वहीं उपस्थित अतिथियों ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया। उपस्थितजनों ने देश की एकता और अखंडता बनाए रखने का संकल्प भी लिया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरुपा सिंह, नगर निगम महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, निगम सभापति श्री हरमिंदर सिंह टिन्नी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री देवनारायण यादव, श्री अखिलेश सोनी,श्री भारत सिंह सिसोदिया , जिला पंचायत सीईओ श्री विनय कुमार अग्रवाल, अपर कलेक्टर श्री सुनील नायक,  एसडीएम श्री बनसिंह नेताम सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न विद्यालय के विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में नागरिकगण शामिल होकर एकता का संदेश दिया।

विभाजन विभीषिका पर आधारित लगाई गई छायाचित्र प्रदर्शनी-
इस दौरान विभाजन विभीषिका पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई। प्रर्दशनी में देश के विभाजन के दौरान हुई मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी के मार्मिक पलों को छायाचित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है, जिससे लोगों को विभाजन के समय की घटनाओं के बारे में जानकारी हो सके। प्रदर्शनी में देश की स्वतंत्रता के समय पलायन करते शरणार्थियों का दृश्य, विभिन्न घटनाओं, समाचार पत्रों में छपे लेखों सहित विभिन्न मार्मिक चित्र प्रदर्शित किए गए हैं।

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