आजीविका डबरी एवं नवा तरिया में मत्स्य पालन को मिला बढ़ावा।

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28 ग्राम पंचायतों की 35 आजीविका डबरी एवं 2 नवा तरिया में लगभग 1 लाख फिंगरलिंग मछली बीज का संचयन

अम्बिकापुर, 14 अगस्त 2026/ कलेक्टर श्री अजीत वसंत के निर्देशन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनय कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन में जिले में ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से विभिन्न विभागों की योजनाओं का अभिसरण कर आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड अम्बिकापुर में वीबी-जी राम जी योजना अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरी एवं नवा तरिया में मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के लिए मत्स्य विभाग द्वारा फिंगरलिंग मछली बीज का वितरण एवं संचयन किया गया।

शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र, दरिमा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विकासखंड अम्बिकापुर अंतर्गत निर्मित 35 आजीविका डबरी एवं 2 नवा तरिया के हितग्राहियों को फिंगरलिंग मत्स्य बीज संचयन योजनांतर्गत 50 प्रतिशत अनुदान पर मछली बीज उपलब्ध कराया गया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित जल संरचनाओं का उपयोग केवल जल संरक्षण तक सीमित न रखते हुए उन्हें आय सृजन और आजीविका का साधन बनाना है।

इस दौरान 45 गांवों के 50 हितग्राहियों को लगभग 1 लाख फिंगरलिंग मछली बीज का वितरण किया गया। हितग्राहियों द्वारा इन मत्स्य बीजों का अपनी आजीविका डबरी एवं नवा तरिया में संचयन किया जाएगा। इससे आने वाले समय में मत्स्य उत्पादन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।

जल संरचनाओं से आय सृजन की ओर बढ़ रहा ग्रामीण क्षेत्र
वीबी-जी राम जी योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार की गई आजीविका डबरी एवं नवा तरिया को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। इन जल संरचनाओं में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने से ग्रामीण परिवारों को अपने गांव में ही आर्थिक गतिविधि का अवसर मिल रहा है। इससे जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।

मत्स्य पालन ऐसी गतिविधि है, जिसे ग्रामीण परिवार उपलब्ध जल संसाधनों का उपयोग करते हुए अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। इसी उद्देश्य से हितग्राहियों को अनुदान के माध्यम से मत्स्य बीज उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे शुरुआती लागत का भार कम हो और अधिक से अधिक हितग्राही मत्स्य पालन से जुड़ सकें।

विभागीय अभिसरण से योजनाओं को मिल रहा नया आयाम
जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं को विभिन्न विभागों की गतिविधियों से जोड़कर अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। आजीविका डबरी एवं नवा तरिया का निर्माण एक ओर जहां जल संरक्षण और ग्रामीण परिसंपत्ति निर्माण को बढ़ावा देता है, वहीं मत्स्य विभाग के सहयोग से इन्हीं संरचनाओं में मत्स्य पालन शुरू होने से यह ग्रामीण परिवारों के लिए आय का माध्यम भी बन रही हैं।

हितग्राहियों को तकनीकी मार्गदर्शन भी
मत्स्य विभाग द्वारा हितग्राहियों को मछली बीज के संचयन, डबरी में मत्स्य पालन, मछलियों की देखभाल एवं उत्पादन से संबंधित आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। हितग्राहियों को मत्स्य पालन की बेहतर पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि उपलब्ध जल संरचनाओं से अधिकतम उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

लगभग 1 लाख फिंगरलिंग मछली बीज के संचयन से इन आजीविका डबरियों एवं नवा तरिया में मत्स्य पालन गतिविधियों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिलेगा। इससे 45 गांवों से जुड़े 50 हितग्राही सीधे लाभान्वित होंगे तथा भविष्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ने पर ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर भी सृजित होंगे।

जिला प्रशासन के प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के प्रभावी अभिसरण से आजीविका डबरी एवं नवा तरिया अब जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका, मत्स्य उत्पादन और आय संवर्धन के केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।

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