श्रीगढ़ भूमि प्रकरण: उच्च न्यायालय में विचाराधीन ।

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चांदमारी भूमि प्रकरण में मामले में जिला प्रशासन ने की वस्तुस्थिति स्पष्ट

अम्बिकापुर, 27 जुलाई 2026/ सोशल मीडिया में प्रसारित प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, अम्बिकापुर (पीठासीन अधिकारी श्री पल्लव रघुवंशी) द्वारा अपर कलेक्टर को सिविल जेल भेजने एवं कलेक्टर को अवमानना के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय में कार्यवाही हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत करने के संबंध में जारी कारण बताओ नोटिस के संबंध में जिला प्रशासन द्वारा वस्तुस्थिति स्पष्ट की गई है।

माननीय जिला न्यायाधीश अम्बिकापुर के व्यवहार वाद क्रमांक 02 अ/1989 (श्री बी.बी.एल. अग्रवाल) नंदकिशोर प्रसाद विरुद्ध श्रीमती सहोदरी व अन्य में पारित आदेश दिनांक 19.03.1991 द्वारा ग्राम श्रीगढ़ स्थित भूमि खसरा क्रमांक 165, 186, 15/1 एवं 19/1 रकबा क्रमशः 1.96, 0.65, 0.60 एवं 0.45 कुल रकबा 3.66 एकड़ तथा मकान का विधिवत बंटवारा कराए जाने का आदेश पारित किया गया था।

उक्त प्रकरण के संबंध में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि दिनांक 31.03.1962 को ग्राम श्रीगढ़ तहसील अम्बिकापुर स्थित भागवत साय एवं चतुर राम पिता तुलसी केशरवानी के नाम दर्ज ग्राम श्रीगढ़ की सेटलमेंट भूमि खसरा क्रमांक 15, 19, 20 एवं 13/2, रकबा क्रमशः 1.15, 2.48, 2.03 एवं 0.30 एकड़, कुल रकबा 6.32 एकड़ को पी.डब्ल्यू.डी. प्रयोजन (चांदमारी/पुलिस फायरिंग प्रशिक्षण) के लिए तत्कालीन मध्यप्रदेश शासन द्वारा तत्कालीन कलेक्टर के हस्ताक्षर से विधिवत पंजीबद्ध विक्रय पत्र के माध्यम से भूमि स्वामियों से ₹1500 विक्रय मूल्य अदा कर क्रय किया गया था।

उक्त भूमि का उपयोग वर्तमान में भी चांदमारी प्रयोजन के लिए किया जा रहा है।

प्रकरण में यह भी उल्लेखनीय है कि व्यवहार वाद क्रमांक 02 अ/1989 में माननीय व्यवहार न्यायालय द्वारा तत्कालीन मध्यप्रदेश शासन/तत्कालीन कलेक्टर को पक्षकार बनाया गया था, किन्तु शासन को उक्त वाद की कोई सूचना नहीं दी गई तथा शासन का पक्ष नहीं सुना गया। जबकि संबंधित भूमि तत्कालीन मध्यप्रदेश शासन द्वारा दिनांक 31.03.1962 को विधिवत पंजीबद्ध विक्रय पत्र के माध्यम से क्रय की जा चुकी थी। उक्त पंजीबद्ध विक्रय पत्र को आज दिनांक तक किसी सक्षम न्यायालय द्वारा निरस्त नहीं किया गया है।

जारी पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि वादी द्वारा यह तथ्य कि संबंधित भूमि तत्कालीन मध्यप्रदेश शासन द्वारा विधिवत पंजीबद्ध विक्रय पत्र के आधार पर क्रय की गई थी, न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया तथा उक्त तथ्य को छिपाते हुए अपने पक्ष में बिक्री प्राप्त की गई। इसके अतिरिक्त लगभग 21 वर्ष के विलंब से उक्त व्यवहार वाद के निष्पादन हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया।

राज्य शासन की ओर से माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर के समक्ष रिव्यू पीटिशन क्रमांक 107/2017 (मध्यप्रदेश शासन, वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन, कलेक्टर सरगुजा विरुद्ध कन्हैया प्रसाद व अन्य) दिनांक 05.09.2017 को प्रस्तुत की गई है। उक्त प्रकरण वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए संबंधित शासकीय भूमि के संबंध में अंतिम निर्णय राज्य शासन अथवा माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय के उपरांत ही किया जाएगा।

जिला प्रशासन द्वारा यह तथ्य भी व्यवहार न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है कि संबंधित भूमि दिनांक 31.03.1962 को पंजीबद्ध विक्रय पत्र के आधार पर शासन द्वारा क्रय की गई थी तथा वर्तमान में चांदमारी प्रयोजन में उपयोग हो रही है। इसके बावजूद व्यवहार न्यायालय के प्रकरण क्रमांक 02अ/1989 नंदकिशोर प्रसाद विरुद्ध जगन व अन्य में पारित आदेश दिनांक 19.03.1991 का निष्पादन नहीं होने के कारण प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, अम्बिकापुर (पीठासीन अधिकारी श्री पल्लव रघुवंशी) द्वारा अपर कलेक्टर सरगुजा को दिनांक 17.04.2026 को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सिविल जेल भेजे जाने के संबंध में नोटिस जारी किया गया। इसी प्रकार कलेक्टर सरगुजा को दिनांक 23.07.2026 को कारण बताओ नोटिस जारी कर आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में न्यायालय की अवमानना के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़, बिलासपुर को सूचित किए जाने की जानकारी दी गई है।

जिसके अनुसार व्यवहार वाद क्रमांक 02अ/1989 (पीठासीन अधिकारी श्री बी.बी.एल. अग्रवाल) नंदकिशोर प्रसाद विरुद्ध श्रीमती सहोदरी व अन्य में पारित आदेश दिनांक 19.03.1991 के पालन हेतु तत्कालीन कलेक्टर द्वारा दिनांक 03.07.2025 को जांच उपरांत नायब तहसीलदार को विधि के अनुरूप आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश प्रदान किए गए हैं।

इसी क्रम में व्यवहार वाद क्रमांक 02अ/1989 के निष्पादन में ग्राम श्रीगढ़ स्थित शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 15/1 एवं 19/1 को छोड़कर अन्य भूमि खसरा क्रमांक 165/1 एवं 186/1, रकबा क्रमशः 0.784 एवं 0.263 हेक्टेयर, कुल रकबा 1.047 हेक्टेयर का व्यवहार न्यायालय के आदेश दिनांक 19.03.1991 के अनुपालन में सक्षम राजस्व न्यायालय द्वारा तीन समान भागों में बंटवारे का आदेश दिनांक 27.07.2026 को पारित कर दिया गया है।

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