लखनपुर के प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक मना रहे मनमाने तरीके से छुट्टी,बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी किसकी।

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लखनपुर के प्राथमिक स्कूलों का हाल इन दिनों छेत्र में काफ़ी बुरा नजर आता है जहाँ स्कूलों में शिक्षकों की मनमानी की शिकायत लगातार सुनाई दे रही है। शिक्षकों की मनमानी और बेपरवाही का आलम इस कदर हावी है की बच्चे अब पढ़ाई से कोसो दूर नजर आते हैं ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि लखनपुर के ग्राम पंचायत सकरिया के आश्रित ग्राम सेलरा के प्राथमिक स्कूल में एक स्वीपर के भरोसे पूरा स्कूल संचालित है जबकि सच्चाई यह है कि वहां दो शिक्षक पदस्थ हैं। स्कूल के शिक्षकों की बात करें तो उसमें एक पुरुष शिक्षक जिनका नाम दिलीप पैकरा और शिक्षिका का नाम धर्मा चौहान है जो की कभी अपने समय पर बच्चों को पढ़ाने के लिए समय पर उपस्थित ही नहीं होते और कभी कभी तो आलम यह होता है कि शिक्षक ही गायब रहते हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि इस स्थिति में आखिर बच्चों के भविष्य को बेहतर शिक्षा के माध्यम से संवारने की जिम्मेदारी किसकी है?क्या दूरस्थ अंचल होने के कारण शिक्षकों को मनमानी ऐसे ही जारी रहेगी और क्या बच्चों को पढ़ाने के लिए एक स्वीपर योग्य है?ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है फिलहाल आपको बता दें की सेलरा स्थित इस प्राथमिक स्कूल में 17 अगस्त सोमवार को सुबह लगभग 05 बजे जब पानी में भीगते पहली से पांचवी के बच्चे स्कूल पहुंचे तो वहाँ नजारा ही कुछ और दिखा जहाँ एक स्वीपर के भरोसे पूरा स्कूल और बच्चों की पढ़ाई करायी जा रही थी ऐसे में शिक्षा विभाग के कार्यप्रणाली और निगरानी नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं कि क्या शिक्षा विभाग दूरस्थ और वनांचल छेत्रों में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को लेकर गंभीर है क्या ऐसे ही उनका भविष्य उज्जवल हो पाएगा या फिर अब एक स्वीपर शिक्षक की भूमिका निभाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षकों की मनमानी लंबे समय से सर दर्द बनी हुई है जहाँ शिक्षक स्कूल का संचालन मनमाने तरीके से करते नजर आते हैं ऐसा लगता है मानो इनके ऊपर किसी का निगरानी नियंत्रण है ही नहीं और इन्हें बच्चों के भविष्य से कोई लेना देना ही नहीं है जब मर्जी किया स्कूल आ गए और जब मर्जी किया एक स्वीपर के भरोसे स्कूल छोड़ चल दिए। अब ऐसे में बच्चों के परिजनों को उनके भविष्य की चिंता सताने लगी है और एक सवाल भी उन्होंने सिस्टम से किया है की यदि स्कूलों में शिक्षक ही उपलब्ध नहीं होंगे तो आखिर में शिक्षा के स्तर में कैसे सुधार हो पाएगी इसी का परिणाम है कि स्कूल में परसेंटेज बढ़ाने के चक्कर में बच्चों को पास तो कर दिया जाता है लेकिन असल मामले में बच्चे अपना नाम तक लिखने नहीं जानते।अब देखना होगा कि विभाग ऐसे शिक्षकों पर किस तरह का कार्यवाही करती है या फिर केवल एक नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर मामले को छोड़ दिया जाएगा ताकि इसी प्रकार बच्चों के भविष्य से शिक्षक आगे भी खेलते रहें।

खंड शिक्षा अधिकारी देव कुमार गुप्ता

इस संबंध में जब खंड शिक्षा अधिकारी देव कुमार गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने कहा की इस संबंध में मामला संज्ञान में आया है नोटिस जारी कर अवैतनिक की कार्रवाई की जा रही है तथा वनांचल क्षेत्र में इस तरीके की मनमानी नहीं चलेगी।

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